घड़ियाल अब अपने ऐतिहासिक विस्तार क्षेत्र के केवल एक छोटे से हिस्से में ही पाया जाता है । इसकी शेष आबादी खंडित है और अन्य मानवीय गतिविधियों के अलावा नदी विनियमन, मछली पकड़ने, रेत खनन और भूमि-उपयोग/भूमि-आवरण परिवर्तनों से उत्पन्न खतरों का सामना कर रही है । इस प्रजाति को गंभीर रूप से लुप्तप्राय (Critically Endangered, IUCN 2019) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है । साथ ही, इसे विकासवादी रूप से विशिष्ट और वैश्विक स्तर पर लुप्तप्राय (Evolutionarily Distinct and Globally Endangered – EDGE, ZSL 2007) माना जाता है ।चंबल नदी की संरक्षण क्षमता और घड़ियाल व अन्य आश्रित प्रजातियों की दीर्घकालिक संभावनाओं के लिए कई मौजूदा और उभरती चुनौतियाँ हैं, जैसे की – नदी विनियमन (इसके अंतर्गत बांध, बैराज, लिफ्ट सिंचाई परियोजनाएं और नदी जोड़ो परियोजनाएं शामिल हैं), प्रवाह संशोधन (शुष्क मौसम के दौरान पारिस्थितिक प्रवाह का रखरखाव न करना और बेमौसम बांध से पानी छोड़ना), अवैध गतिविधियाँ (रेत खनन के साथ-साथ डायनामाइट और गिल-नेट के माध्यम से मछली पकड़ना), भूमि-उपयोग परिवर्तन (कृषि विस्तार, बीहड़ों का समतलीकरण और रैखिक घुसपैठ आदि । ये सभी कारक संयुक्त रूप से घड़ियाल के अस्तित्व और उनके प्राकृतिक आवास को गंभीर रूप से सीमित कर रहे हैं ।

घड़ियाल संरक्षण-निर्भर जीव है, और इसकी आबादी के दीर्घकालिक अस्तित्व एवं निरंतरता के लिए स्थल-विशिष्ट हस्तक्षेपों की आवश्यकता है। घड़ियाल की आबादी और नदी परिदृश्यों को सुरक्षित करने के लिए, डब्लू.सी.टी. निम्नलिखित प्रयास कर रहा है: (क) मौजूदा घड़ियाल आबादी और उनके आवासों की व्यवहार्यता का आकलन करना। (ख) प्रभावी आबादी निगरानी उपकरण विकसित करना।(ग) वर्तमान प्रबंधन प्रथाओं का मूल्यांकन करना।(घ) विनियमित नदियों में पारिस्थितिक प्रवाह की आवश्यकताओं का अनुमान लगाना। (ङ) फ्रंटलाइन सुरक्षा कर्मियों की क्षमता निर्माण करना। (च) संचार, शिक्षा और जागरूकता आउटरीच के माध्यम से स्थानीय समुदायों को जोड़ना।

संक्षेप में, डब्लू.सी.टी. अपने ‘कार्यक्रम मकर’ के तहत चंबल नदी के साथ-साथ सोन, घाघरा और गंडक नदियों पर विशेष बल देते हुए घड़ियाल संरक्षण के लिए एक कार्ययोजना तैयार कर रहा है।




हेडर फोटो क्रेडिट: डॉ. अनीश अंधेरिया


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