हमारा ३६०° दृष्टिकोण

छह सौ नदियाँ, भारत के बाघ-प्रभावी जंगलों से निकलती हैं या उनसे पोषित होती हैं, जिससे ये आवास, हमारी जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हो जाते हैं। जंगलों में और उसके आसपास रहने वाले लाखों लोगों के साथ, हम समुदायों को संरक्षण से अलग नहीं कर सकते। इसे स्वीकार करते हुए, WCT ने, वनजीवन संरक्षण और सामुदायिक विकास पर, समान रूप से ध्यान केंद्रित करके, संरक्षण के लिए ३६०° दृष्टिकोण अपनाया है।

वन्यजीव संरक्षण

हमारे प्रमुख,विज्ञान आधारित संरक्षण कार्यक्रम,दुर्लभ प्रजातियाँ जैसे,बाघ,तेंदुआ, पैंगोलिन,गंगा नदी डोल्फिंस,घड़ियाल,मीठे पानी में रहने वाले कछुए,पर केन्द्रित हैं,जो प्रमुखता से,पारिस्थितिकी के महत्व को दर्शाते हैं और साथ ही साथ,भव्य भूमि और नदी के परिदृश्य के सुरक्षा तंत्र को, और मज़बूत बनाते हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र और समुदाय

हम जन वित्तीय को काम में लाने पर काम कर रहे हैं,ताकि हम सभी प्रकार के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों की रक्षा कर सकें,जिसमे,घास के मैदान,रेगिस्तान,दलदली भूमि,कच्छ वनस्पति,और वन भी शामिल हैं,साथ ही साथ, हम उन समुदायों की विकसित आवशयताओं पर भी काम कर रहे हैं,जो इन इलाकों के आसपास बसर करते हैं।

प्रभाव

वर्तमान में हम,भारत के,१७० संरक्षित इलाकों में,काम कर रहे हैं,जो भारत के,२३,राज्यों में,और ४ केन्द्रीय शासित प्रदेशों,में आते हैं,जिसमे से,८२% हिस्सा,भारत के बाघ आरक्षित,२५% राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों का है,जो कम से कम, ३.५ मिलियन की जनसंख्या को प्रभावित करते हैं।

जलवायु एवं संघर्ष निराकरण

मध्य भारत में, हमारे दीर्घकालिक पारिस्थितिकी अनुसंधान और उसके के साथ साथ आर्थिक और मनोसामाजिक अध्ययन ने,बड़े पैमाने पर,जैव ईंधन के दत्तक ग्रहण,ऊर्जा कुशल वॉटर हीटर(पानी गरम करनेवाला यंत्र)के विकास में, एक अहम भूमिका निभाई है,जिसके कारण,ईंधन की लकड़ी के उपयोग में,वन क्षरण में और मानव-मांसभक्षी संघर्ष में कमी आई है।

पारिस्थितिकी तंत्र की पुनर्स्थापना

हमने, एक ऐसे पुनर्स्थापना करनेवाले कार्यक्रम पर काम करना आरंभ कर दिया है,जो,प्राकृतिक वनस्पतियों और जैव विविधता को,क्षरण हुईं झाड़ियाँ,घास के मैदान,और वन भूमि को,स्थानीय समुदाय और भूमि धारकों की सहायता से पुनर्स्थापित करेगा।

Wildlife Conservation Trust – An Overview of Our 360 Degree Approach
A Water Heater of Hope

Latest from the Blog

मिट्टी से आकाश तक

सारस क्रेन पर मंडराते खतरे “इस प्रजनन मौसम में हमें केवल तीन घोंसले मिले। पाँच चूजों में से केवल दो ही जीवित बचे। मौसम की शुरुआत में अपने चूजों को खोने वाले एक... Read More

मध्य भारत की जंगली भैंसें

मध्य भारतीय वनों के करिश्माई स्तनधारियों के बारे में सोचते समय आमतौर पर जिन प्रजातियों का ध्यान आता है, वे हैं बाघ, तेंदुआ, धोल, कठोर भूमि पर रहने वाला बारहसिंगा और गौर। हाथियों... Read More

‘हरियाली हमेशा अच्छी नहीं होती’

अत्यधिक अनुकूलन क्षमता, भीषण सूखे और रोगों को सहने की ताकत, गहरी जड़ें, तेज़ बढ़वार, कठोर स्वभाव, आक्रामकता, ‘पागलपन’ – गरम और शुष्क क्षेत्रों में जीने के लिए विकसित किसी भी पौधे के... Read More

काँटेदार झाऊ-चूहा

प्रकृति में उद्विकास की प्रक्रिया के दौरान अनेक जीवों ने बदलते पर्यावास में अपनी प्रजाति का अस्तित्व बनाए रखने के लिए विभिन्न सुरक्षा प्रणालियों को विकसित किया है। कुछ जीवों ने सुरक्षा के... Read More

WCT ने 2025 का सैटेलाइट्स फॉर बायोडायवर्सिटी अवार्ड हासिल किया!

डब्ल्यू0 सी0 टी0 को 2025 के सैटेलाइट्स फॉर बायोडायवर्सिटी पुरस्कार विजेताओं में से एक के रूप में चुना गया है! ब्रिटेन स्थित कनेक्टेड कंज़र्वेशन फाउंडेशन (सी0 सी0 एफ0) और एयरबस फाउंडेशन के साथ... Read More

सागरेश्वर की कहानी – पुनर्वन्यकरण (रीवाइल्डिंग) का एक प्रयोग

सागरेश्वर वन्यजीव अभयारण्य, महाराष्ट्र के सांगली ज़िले में स्थित एक 10.87 वर्ग किमी का छोटा किन्तु अनोखा संरक्षित क्षेत्र है। यह अभयारण्य विशेष रूप से इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि इसे एक मानव निर्मित... Read More