Latest from the Blog
बन्नी का जीवन और उसकी अनेक कहानियाँ
यह फरवरी 2014 की बात है। बन्नी में सर्दियाँ धीरे-धीरे विदा लेने लगी थीं। हम कच्छ के पथरीले भूभाग से गुजर रहे थे, छोटी-छोटी लहरदार पहाड़ियाँ, जिन पर कहीं-कहीं यूफोर्बिया की विरल झाड़ियाँ... Read More
उत्तर बिहार में फिशिंग कैट के संरक्षण की तात्कालिक आवश्यकता
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर बिहार के नदीय बाढ़क्षेत्रों में संकटग्रस्त फिशिंग कैट की मौजूदगी को लेकर हमारी आशंकाएँ सही साबित हुईं, जब इस दुर्लभ प्रजाति के देखे जाने की खबरें विभिन्न स्थानों... Read More
मिट्टी से आकाश तक
सारस क्रेन पर मंडराते खतरे “इस प्रजनन मौसम में हमें केवल तीन घोंसले मिले। पाँच चूजों में से केवल दो ही जीवित बचे। मौसम की शुरुआत में अपने चूजों को खोने वाले एक... Read More
मध्य भारत की जंगली भैंसें
मध्य भारतीय वनों के करिश्माई स्तनधारियों के बारे में सोचते समय आमतौर पर जिन प्रजातियों का ध्यान आता है, वे हैं बाघ, तेंदुआ, धोल, कठोर भूमि पर रहने वाला बारहसिंगा और गौर। हाथियों... Read More
‘हरियाली हमेशा अच्छी नहीं होती’
अत्यधिक अनुकूलन क्षमता, भीषण सूखे और रोगों को सहने की ताकत, गहरी जड़ें, तेज़ बढ़वार, कठोर स्वभाव, आक्रामकता, ‘पागलपन’ – गरम और शुष्क क्षेत्रों में जीने के लिए विकसित किसी भी पौधे के... Read More
काँटेदार झाऊ-चूहा
प्रकृति में उद्विकास की प्रक्रिया के दौरान अनेक जीवों ने बदलते पर्यावास में अपनी प्रजाति का अस्तित्व बनाए रखने के लिए विभिन्न सुरक्षा प्रणालियों को विकसित किया है। कुछ जीवों ने सुरक्षा के... Read More







